Coimbatore district

कोयम्बटूर जिला

Coimbatore district

(District of Tamil Nadu in India)


District History

कोयम्बटूर जिले का इतिहास (History of Coimbatore District)

कोयम्बटूर का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा हुआ है। यह क्षेत्र पहले "कोंगु देश" के नाम से जाना जाता था, जिसका उल्लेख संगम काल के साहित्य में मिलता है।

प्रारंभिक काल

  • कोसर जनजाति: प्रारंभिक दिनों में यह क्षेत्र विभिन्न जनजातियों का निवास स्थान था, जिनमें सबसे प्रमुख कोसर जनजाति थी। माना जाता है कि उनका मुख्यालय कोसामपथुर में था, जो बाद में कोयम्बटूर बन गया।
  • राष्ट्रकूटों का शासन: कोसर जनजाति का शासन राष्ट्रकूटों द्वारा समाप्त कर दिया गया।
  • चोलों का आगमन: राष्ट्रकूटों के बाद चोलों का शासन स्थापित हुआ, जो राजा राजा चोल के समय अपने शिखर पर थे।
  • चालुक्य, पांड्य और काकतीयों का शासन: चोलों के पतन के बाद, कोंगु क्षेत्र पर क्रमशः चालुक्यों, पांड्यों और काकतीयों का शासन रहा।
  • मदुरै सुल्तानों का आगमन: पांड्य साम्राज्य में आंतरिक संघर्ष के कारण दिल्ली के मुस्लिम शासकों का हस्तक्षेप हुआ, जिससे यह क्षेत्र मदुरै सुल्तानों के नियंत्रण में आ गया।
  • विजयनगर साम्राज्य: 1377-78 में, विजयनगर शासकों ने मदुरै सुल्तानों को परास्त करके इस क्षेत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित किया।
  • मदुरै नायकों का शासन: कुछ वर्षों के लिए यह क्षेत्र मदुरै नायकों के स्वतंत्र नियंत्रण में रहा।
  • मैसूर शासकों का नियंत्रण: मुतु वीरप्पा नायक और फिर तिरुमल नायक के शासनकाल में आंतरिक संघर्षों और युद्धों ने साम्राज्य को तबाह कर दिया। परिणामस्वरूप, तिरुमल नायक के शासनकाल में, कोंगु क्षेत्र मैसूर शासकों के हाथों में चला गया।
  • हैदर अली का शासन: हैदर अली ने मैसूर शासकों से इस क्षेत्र को अपने नियंत्रण में ले लिया।
  • ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन: 1799 में टीपू सुल्तान के पतन के बाद, कोंगु क्षेत्र मैसूर के महाराजा को सौंप दिया गया, जिन्हें टीपू सुल्तान को हराने के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने सत्ता में बहाल कर दिया था। तब से लेकर 1947 तक, जब भारत स्वतंत्र हुआ, यह क्षेत्र ब्रिटिश नियंत्रण में रहा। ब्रिटिशों ने इस क्षेत्र में व्यवस्थित राजस्व प्रशासन की शुरुआत की।

आधुनिक काल

  • 1804: राजस्व प्रशासन के उद्देश्यों के लिए, कोयम्बटूर को दो भागों में विभाजित किया गया था। 1804 में, इन क्षेत्रों को एक में मिला दिया गया और एक जिला कलेक्टर के अधीन लाया गया।
  • 1868: नीलगिरी जिले को कोयम्बटूर जिले से अलग किया गया।
  • 20वीं शताब्दी की शुरुआत: जिले में 10 तालुक थे: भवानी, कोयम्बटूर, धरपुरम, एरोड, करूर, कोल्लेगल, पल्लादम, पोलाची, सत्यमंगलम और उदुमलपेट्टई।
  • 1956: राज्य पुनर्गठन योजना के तहत, जिले का एक बड़ा हिस्सा, जिसमें कोल्लेगल तालुक शामिल था, मैसूर राज्य को सौंप दिया गया।
  • 1975: सत्यमंगलम उप-तालुक को पूर्ण तालुक में पदोन्नत किया गया।
  • 1979: एरोड तालुक के पेरुंडुरई उप-तालुक और अवनाशी के मेट्टूपालयम उप-तालुक को स्वतंत्र तालुक में पदोन्नत किया गया।
  • 1979: एरोड जिले के निर्माण के लिए जिले से 6 तालुक अलग किए गए: भवानी, गोपीचेत्तिपालाई, सत्यमंगलम, एरोड, पेरुंडुरई और धरपुरम।
  • 2008: तिरुपुर जिले के निर्माण के लिए कोयम्बटूर जिले से 4 तालुक (तिरुपुर, उदुमलपेट, पल्लादम और अवनाशी (भाग)) और एरोड जिले से 3 तालुक (धरपुरम, कंगयम और पेरुंडुरई (भाग)) अलग किए गए।
  • 2014: कोयम्बटूर (दक्षिण) तालुक को तीन तालुक में विभाजित किया गया, जिससे मदुक्काराई और पेरुर तालुक का निर्माण हुआ। कोयम्बटूर (उत्तर) राजस्व उप-विभाग और कोयम्बटूर (दक्षिण) राजस्व उप-विभाग का निर्माण किया गया।
  • 2018: पोलाची तालुक, जो जिले का सबसे बड़ा तालुक था, को विभाजित करके अनाइमलाई तालुक का निर्माण किया गया।

वर्तमान में, कोयम्बटूर जिले में 11 तालुक हैं: कोयम्बटूर (दक्षिण), कोयम्बटूर (उत्तर), पेरुर, मदुक्काराई, अननूर, मेट्टूपालयम, सुलूर, पोलाची, किनाथुकदावू, अनाइमलाई और वाल्पराई।

कोयम्बटूर जिले का विकास: कोयम्बटूर जिले ने कपड़ा, इंजीनियरिंग, शिक्षा, कृषि और पर्यटन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। यह एक प्रमुख औद्योगिक और शैक्षणिक केंद्र के रूप में उभरा है।

यह जानकारी आपको कोयम्बटूर जिले के इतिहास को समझने में मदद करेगी।




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