Dindigul district

डिंडीगुल जिला

Dindigul district

(District of Tamil Nadu in India)


District History

दिंडीगुल ज़िले का इतिहास (History of Dindigul District in Hindi)

दिंडीगुल ज़िले का इतिहास, पहाड़ी चट्टान पर बने किले के इर्द-गिर्द घूमता है। दक्षिण भारत के तीन प्रमुख राज्यों - पांड्या, चेरा और चोला - की सीमा पर स्थित था यह क्षेत्र।

प्राचीन काल (Ancient Times):

  • पहली शताब्दी ईस्वी: चोला राजा करिकल चोलन ने पांड्या राज्य पर विजय प्राप्त की और दिंडीगुल चोला शासन के अधीन आ गया।
  • छठी शताब्दी: पल्लवों ने दक्षिण भारत के अधिकांश प्रांतों पर कब्ज़ा कर लिया और दिंडीगुल पल्लव शासन के अधीन रहा जब तक कि चोलों ने 9वीं शताब्दी में राज्य को पुनः प्राप्त नहीं कर लिया।
  • 13वीं शताब्दी: पांड्याओं ने फिर से दिंडीगुल पर नियंत्रण कर लिया।

मध्ययुगीन काल (Medieval Times):

  • 14वीं शताब्दी: दिल्ली सल्तनत ने तमिलनाडु के अधिकांश राज्यों पर शासन किया और 1335-1378 के बीच मधुरै सल्तनत इस क्षेत्र पर शासन करती थी।
  • 1378: विजयनगर सेना ने मुस्लिम शासकों को हराया और अपना शासन स्थापित किया।
  • 1559: मधुरै नायक, जो विजयनगर साम्राज्य का हिस्सा थे, शक्तिशाली हो गए और दिंडीगुल उनके राज्य के लिए उत्तर से एक रणनीतिक प्रवेश द्वार बन गया।
  • 1602: राजा विश्वनाथ नायक की मृत्यु के बाद, मुथुकृष्णा नायक 1602 ईस्वी में राज्य के राजा बने और 1605 ईस्वी में उन्होंने पहाड़ी पर एक मजबूत किला बनवाया। उन्होंने पहाड़ी के तल पर भी एक किला बनवाया।
  • 17वीं शताब्दी: मुथुवीरप्पा नायक और तिरुमलाई नायक ने मुथुकृष्णा नायक का उत्तराधिकारी बना। तिरुमलाई नायक के शासनकाल में दिंडीगुल फिर से प्रसिद्ध हुआ।

मैसूर राज्य और हैदर अली (Mysore Kingdom and Hyder Ali):

  • 1742: मैसूर सेना ने वेंकटरय्या के नेतृत्व में दिंडीगुल पर विजय प्राप्त की। उन्होंने मैसूर के महाराजा के प्रतिनिधि के रूप में दिंडीगुल पर शासन किया।
  • 1748: वेंकटप्पा को वेंकटरय्या के स्थान पर क्षेत्र का गवर्नर बनाया गया, लेकिन वे भी असफल रहे।
  • 1755: मैसूर महाराजा ने स्थिति को संभालने के लिए हैदर अली को दिंडीगुल भेजा।
  • 1777: हैदर अली ने दिंडीगुल का गवर्नर बनकर मैसूर के वास्तविक शासक बन गए।
  • 1783: ब्रिटिश सेना ने कैप्टन लॉन्ग के नेतृत्व में दिंडीगुल पर आक्रमण किया।
  • 1784: मैसूर प्रांत और ब्रिटिश सेना के बीच एक समझौते के बाद, दिंडीगुल को मैसूर प्रांत द्वारा वापस कर दिया गया।
  • 1788: हैदर अली के बेटे टीपू सुल्तान को दिंडीगुल का राजा घोषित किया गया।

ब्रिटिश शासन (British Rule):

  • 1790: मैसूर के दूसरे युद्ध में, ब्रिटिश सेना के जेम्स स्टीवर्ट ने दिंडीगुल पर कब्ज़ा कर लिया।
  • 1792: टीपू ने दिंडीगुल और किला अंग्रेजों को सौंप दिया।
  • 1798: ब्रिटिश सेना ने पहाड़ी किला को तोपों से मजबूत किया और हर कोने में चौकीदार कमरे बनवाए।
  • 1859: मधुरै को ब्रिटिश सेना का मुख्यालय बनाया गया और दिंडीगुल को एक तालुक के रूप में मधुरै से जोड़ा गया।
  • 1947: भारत की स्वतंत्रता तक दिंडीगुल ब्रिटिश शासन के अधीन रहा।

पॉलीगर युद्ध (Polygar Wars):

  • 18वीं शताब्दी के अंतिम दशकों में पॉलीगर युद्धों के दौरान किले ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • पॉलीगारों, टीपू सुल्तान और फ्रांसीसी लोगों ने ब्रिटिशों के खिलाफ युद्ध किया।
  • विरुपाची के पॉलीगर, गोपाल नायक ने पॉलीगरों के दिंडीगुल डिवीजन का नेतृत्व किया और युद्धों के दौरान, उन्होंने सिवागंगा रानी, रानी वेलु नचियार और उनके कमांडरों मरुथु पांडियार ब्रदर्स को किले में रहने की अनुमति दी।

आधुनिक काल (Modern Times):

  • स्वतंत्रता के बाद, दिंडीगुल तमिलनाडु राज्य का एक ज़िला बन गया।
  • यह ज़िला अपनी कृषि, कपास की खेती और हैंडीक्राफ्ट उद्योगों के लिए जाना जाता है।
  • दिंडीगुल किला आज भी पर्यटकों का आकर्षण है।

यह दिंडीगुल ज़िले के इतिहास का एक संक्षिप्त विवरण है। ज़िले का इतिहास लंबा और समृद्ध है, जिसमें कई सभ्यताओं और शासकों का प्रभाव है।




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